संप्रभुता पर समझौता नहीं : विक्रमादित्य सिंह का बयान
विक्रमादित्य सिंह ने कहा, विकास के नाम पर संप्रभुता से समझौता नहीं। टैरिफ, तेल आयात और विदेश नीति पर केंद्र सरकार पर उठाए सवाल।
रोजाना हिमाचल ब्यूरो । शिमला
हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि विकास के नाम पर आंखों पर पट्टी नहीं बांधी जा सकती, खासकर तब जब देश की संप्रभुता और आत्मसम्मान से समझौता हो रहा हो। उन्होंने कहा कि हिमाचल की धरती स्वाभिमान और साहस का प्रतीक रही है और एक जनसेवक के रूप में उनका कर्तव्य राज्य के विकास के लिए हर संभव प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि संघीय ढांचे की मजबूती के लिए केंद्र और राज्य सरकारों का मिलकर काम करना जरूरी है।
हिमाचल के बुनियादी ढांचे, सड़कों और शहरी विकास के लिए केंद्र के साथ सहयोग जारी रहेगा। विक्रमादित्य सिंह ने राम माधव के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे हर भारतीय को झटका लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय दबाव में 50 प्रतिशत टैरिफ स्वीकार कर लिया और अमेरिका के प्रभाव में आकर रूस व ईरान जैसे पुराने सहयोगियों से तेल आयात कम किया। उनके अनुसार यह आर्थिक स्वायत्तता से समझौता है। उन्होंने कहा कि विदेश नीति को मजबूत बताया जाता है, लेकिन ऐसे फैसले देश की कमजोरी दिखाते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह सख्ती केवल देश के भीतर विपक्ष और संस्थाओं पर दिखाई जाती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती नहीं दिखती। मंत्री ने कहा कि महंगे पेट्रोल-डीजल से आम जनता, किसान और व्यापारी प्रभावित हैं। सस्ते तेल के विकल्प छोड़ने से आर्थिक बोझ बढ़ा है। उन्होंने कहा कि 50 प्रतिशत टैरिफ निर्यातकों के लिए नुकसानदायक है। अंत में उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार विकास के लिए केंद्र के साथ काम करेगी, लेकिन राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। भारत की संप्रभुता सर्वोपरि है।
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