चक्की ब्रिज तैयार, कांगड़ा रेल सेवा फिर पटरी पर

चक्की ब्रिज का पुनर्निर्माण पूरा, कांगड़ा घाटी रेलवे पर ट्रेन सेवा बहाल। यूनेस्को टेंटेटिव सूची में शामिल होने से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा।

Mar 18, 2026 - 22:21
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चक्की ब्रिज तैयार, कांगड़ा रेल सेवा फिर पटरी पर

रोजाना हिमाचल ब्यूरो। शिमला 
पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने संसद में हिमाचल प्रदेश और कांगड़ा घाटी क्षेत्र के लोगों से जुड़ी महत्वपूर्ण चक्की नदी रेलवे पुल से जुड़े प्रश्न पर रेल मंत्रालय ने बताया कि 20 अगस्त 2022 को भारी बारिश में बह गए महत्वपूर्ण चक्की खड ब्रिज नंबर 32 का पुनर्निर्माण का कार्य पूरी तरह से पूरा हो गया है। अब ट्रैक को पठानकोट से जोगिंदरनगर तक पूरे खंड में ट्रेन संचालन के लिए उपयुक्त घोषित कर दिया गया है। अनुराग सिंह ठाकुर इस महत्वपूर्ण रेल लिंक की बहाली के लिए लगातार प्रयासरत रहे हैं। क्षेत्र के लोगों की ओर से उनकी लगातार पैरवी ने इस परियोजना को रेलवे की प्राथमिकता सूची में बनाए रखने और बहाली कार्यों को समय पर पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अनुराग सिंह ठाकुर के प्रश्न पर रेल मंत्रालय ने संसद में यह बताया कि यूनेस्को ने कांगड़ा घाटी रेलवे को ‘माउंटेन रेलवे ऑफ इंडिया’ विश्व धरोहर स्थल के विस्तार के रूप में अपनी टेंटेटिव हेरिटेज सूची में शामिल कर लिया है। इससे कांगड़ा घाटी रेलवे लाइन, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, कालका -शिमला रेलवे और नीलगिरि माउंटेन रेलवे की प्रतिष्ठित श्रेणी में सम्मिलित हो गई है। टेंटेटिव सूची में शामिल होना पूर्ण यूनेस्को नामांकन की ओर पहला औपचारिक कदम है।

अनुराग सिंह ठाकुर ने इन विकासों पर गहरी संतुष्टि व्यक्त की है और हिमाचल प्रदेश के लोगों को विश्व स्तरीय रेल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष स्नेह के कारण हिमाचल प्रदेश में रेल सेवाओं के विस्तार को पिछले 12 वर्षों में नई गति मिली है। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि  “चक्की ब्रिज की बहाली और पूर्ण ट्रेन सेवाओं का पुनरारंभ केवल शुरुआत है,  कांगड़ा घाटी रेलवे को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बनाना है, जो हिमाचल प्रदेश को वैश्विक विरासत पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करेगा और घाटी भर में हजारों परिवारों के लिए आजीविका उत्पन्न करेगा। कांगड़ा घाटी रेलवे के भविष्य को और मजबूत करते हुए, रेल मंत्रालय ने मौजूदा पठानकोट-जोगिंदरनगर नैरो गेज खंड (लगभग 200 किलोमीटर) को ब्रॉड गेज में बदलने के लिए सर्वेक्षण को मंजूरी दी है, और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए फील्ड सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है।

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