लाखों लोगों की जान बचाने वाले हिम केयर को घोटाला कहना बेशर्मी : जयराम ठाकुर

हिम केयर योजना पर विवाद गहराया, जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर निशाना साधा। योजना बंद करने की साजिश का आरोप, स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल।

Mar 26, 2026 - 18:04
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लाखों लोगों की जान बचाने वाले हिम केयर को घोटाला कहना बेशर्मी : जयराम ठाकुर
अपने आधिकारिक आवास पर कंचक पूजन करते नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर एवं डॉ साधना ठाकुर।

रोजाना हिमाचल ब्यूरो। शिमला : 
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि लाखों लोगों की जान बचाने वाले, लोगो में इलाज करवाने का हौसला देने वाले हिम केयर को मुख्यमंत्री द्वारा घोटाला कहना सिर्फ और सिर्फ बेशर्मी है। सरकार को यह बात आज भी चुभती है कि लोगों की जुबान पर भाजपा की दर्जनों योजनाएं रटी हुई हैं, लेकिन इस सरकार के मंत्रियों के पास भी तीन साल बाद बताने के लिए कोई ढंग की तीन योजनाएं नहीं हैं। इसलिए लोगों को जिंदगी देने वाली योजनाओं को बंद करने की साज़िश कर रही है। जिन योजनाओं ने लोगों की जिंदगी बदली, उन्हें बंद कर यह सरकार भले ही राजनीतिक बदले की कार्रवाई करे लेकिन प्रदेश के लोग सरकार को माफ़ नहीं करेंगे। हमारी सरकार में ही हिम केयर और आयुष्मान के तहत साढ़े पांच लाख से ज्यादा लोगों का इलाज हुआ जिस पर 500 करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च हुए।

मुख्यमंत्री एक ‘वेलफ़ेयर स्टेट’ का मतलब और उसका भाव नहीं समझ सकते हैं। वह कभी हिम केयर के उन लाभार्थियों से नहीं मिले। जिन्होंने अपनी आर्थिक हालत को देखते हुए इलाज करवाने के बजाय बीमारी छुपाने का फैसला किया। लेकिन हिम केयर ने उन्हें नई जिंदगी दी। तीन साल के कार्यकाल में जब उनके पास दिखाने के लिए अपनी नाकामियों के अलावा कुछ नहीं तो सरकार साजिशों पर उतर आई है। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री क्या कहते हैं, उन्हें ख़ुद पता नहीं चलता है। मुख्यमंत्री ने 25 मार्च को सदन में कहा कि हमने 972 करोड़ खर्च किए, उसके 5 मिनट बाद बोला कि 750 करोड़ रुपर खर्च किए। 19 मार्च को सदन में बोला कि 1072 करोड़ खर्च किए? भाजपा ने सिर्फ 450 करोड़ खर्च किए। तीनो बातें मुख्यमंत्री ने सदन में इसी सत्र में ही कही हैं, अब सवाल यह हैं कि उनकी कौन सी बात सही है?

जयराम ठाकुर ने कहा कि संस्थान बंद करने के मिशन को पूरा करने के बाद अब मुख्यमंत्री अब योजनाओं को बंद करने के अभियान चला रहे हैं। स्वावलंबन के बाद अब शगुन और कन्यादान योजना भी बंद हुई। ग़रीब बेटियों के लिए शगुन और कन्यादान योजना का महत्व मुख्यमंत्री को समझ आता तो वह इसे पहले निष्क्रिय और अब बंद नहीं करते। हमारी सरकार में हमने कन्यादान योजना की राशि 31 से बढ़ाकर 51 हज़ार की और शगुन योजना शुरू की। लेकिन वर्तमान सरकार ने दोनों योजनाएं बंद करने की घोषणा कर दी है। 

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