लोअर हटवास में गूंजा “नंद के आनंद भयो”! श्रीकृष्ण जन्म पर झूमे श्रद्धालु
लोअर हटवास में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्म उत्सव धूमधाम से मनाया गया। कथावाचक संतोष शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण की लीला का भावपूर्ण वर्णन किया।
सुमन महाशा। कांगड़ा
लोअर हटवास में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान रविवार को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। श्रीकृष्ण जन्म की झांकी और कथा सुनते ही पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु झूम उठे।
कथावाचक संतोष शर्मा ने श्रीकृष्ण जन्म की विस्तृत कथा का वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार अत्याचारी कंस के कड़े पहरे के बावजूद काल कोठरी में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेकर असुरी शक्तियों का अंत किया।
उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि परमात्मा इस सृष्टि का परम सौंदर्य है और उसे समझने के लिए श्रद्धा और भावनाओं से भरा हृदय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मस्तिष्क तर्क और गणित को स्वीकार कर सकता है, लेकिन प्रेम और भक्ति को समझने के लिए हृदय की आवश्यकता होती है।
कथावाचक ने संत कबीर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा—“लिखा लिखी की है नहीं, देखा देखी बात”, अर्थात ईश्वर को केवल अनुभव किया जा सकता है, शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने समझाया कि जैसे अंधा व्यक्ति प्रकाश को पढ़कर नहीं जान सकता और बहरा व्यक्ति संगीत को अनुभव नहीं कर सकता, उसी प्रकार ईश्वर का साक्षात्कार भी अनुभव से ही संभव है।
कथा के दौरान मत्स्य अवतार, भगवान श्रीराम के चरित्र और श्रीकृष्ण की लीलाओं का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ सुना।
कथा आयोजक अरविन्द वर्मा ने जानकारी दी कि 21 अप्रैल को कथा का समापन होगा। उस दिन सुबह 10 बजे से 12 बजे तक कथा का अंतिम सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसके बाद शांति हवन यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे क्षेत्र में भक्ति व उत्साह का माहौल बना रहा।
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