एमसीएम डीएवी में पॉलिमर पर पोस्टर प्रतियोगिता
एमसीएम डीएवी कॉलेज कांगड़ा में रसायन विज्ञान विभाग ने ‘हमारे आसपास के पॉलिमर: वरदान या अभिशाप’ विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित कर पर्यावरण जागरूकता का संदेश दिया।
कांगड़ा।
एमसीएम डीएवी कॉलेज कांगड़ा के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा “हमारे आसपास के पॉलिमर: वरदान या अभिशाप” विषय पर पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को पॉलिमरों की उपयोगिता और पर्यावरण पर उनके प्रभाव के प्रति जागरूक करना था।
प्रतियोगिता में स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) कक्षाओं के लगभग 40 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी वैज्ञानिक समझ और रचनात्मक सोच का परिचय दिया।
प्लास्टिक प्रदूषण से सतत विकास तक उठाए मुद्दे
प्रतिभागियों ने अपने पोस्टरों में कई समसामयिक विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिनमें शामिल रहे—
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प्लास्टिक प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक्स के दुष्प्रभाव
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सिंगल-यूज़ प्लास्टिक की समस्या
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पुनर्चक्रण (Recycling) की आवश्यकता
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जैव-अवक्रमणीय (Biodegradable) पॉलिमर
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सतत विकास (Sustainable Development)
विद्यार्थियों ने ग्राफ, शोध आधारित तथ्य और चित्रों के माध्यम से यह दर्शाया कि पॉलिमर आधुनिक जीवन के लिए उपयोगी होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए चुनौती भी बनते जा रहे हैं।
इन विद्यार्थियों ने जीते पुरस्कार
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए—
🥇 प्रथम स्थान: एम.एससी. रसायन विज्ञान के छात्र प्रशांत
🥈 द्वितीय स्थान (संयुक्त): अर्शिया एवं प्रियंका, प्रज्वल एवं कोमल, अर्शिया-शगुन-अदिति-दीपांशी
🥉 तृतीय स्थान: अतुल एवं शिल्पा, गितेश एवं साक्षी
निर्णायक मंडल में डॉ. यांचन डोलमा, डॉ. रजनीश, डॉ. राकेश राणा और डॉ. शिल्पा पटियाल शामिल रहे। मूल्यांकन विषय-वस्तु, प्रस्तुति कौशल, रचनात्मकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर किया गया।
प्राचार्य का संदेश
कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बलजीत सिंह पटियाल ने कहा कि ऐसी शैक्षणिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से आगे सोचने और समाज व पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने के लिए प्रेरित करती हैं।
उन्होंने सभी प्रतिभागियों और विजेताओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
निष्कर्ष
यह प्रतियोगिता केवल एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक जागरूकता की दिशा में एक सकारात्मक पहल रही। छात्रों की सक्रिय भागीदारी ने यह साबित किया कि नई पीढ़ी पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति सजग है और समाधान की दिशा में सोच रही है।
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