40 साल से सड़क नहीं, अब पूरे गांव ने किया चुनाव बहिष्कार
नूरपुर के खैरियां पंचायत के चूहक गांव में सड़क न बनने से ग्रामीणों में भारी रोष। 40 साल से सड़क की मांग पूरी न होने पर चुनाव बहिष्कार का ऐलान।
नूरपुर से रघुनाथ शर्मा की रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के नूरपुर विधानसभा क्षेत्र की खैरियां पंचायत में चुनावी माहौल के बीच एक बड़ा विरोध सामने आया है। पंचायत के वटनियाल वार्ड स्थित बरोट यानी चूहक गांव के लोगों ने पंचायती राज चुनावों के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब 40 वर्षों से सड़क की मांग लगातार उठाई जा रही है, लेकिन आज तक गांव तक सड़क सुविधा नहीं पहुंची।
करीब 150 से अधिक आबादी वाले इस गांव में लोगों ने एकजुट होकर “सड़क नहीं तो वोट नहीं” का नारा बुलंद किया है। गांव में इस फैसले को लेकर काफी चर्चा है और लोगों में प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी साफ दिखाई दे रही है।
40 साल से सड़क का इंतजार
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1985 से गांव के लोग सड़क सुविधा की मांग कर रहे हैं। हर चुनाव में नेता गांव पहुंचते हैं और सड़क निर्माण के बड़े-बड़े वादे कर चले जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव को भुला दिया जाता है।
ग्रामीणों ने बताया कि आज भी उन्हें कच्चे रास्तों, खड्डों और कीचड़ भरे मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात के समय हालात और भी खराब हो जाते हैं।
ग्रामीणों की मुख्य समस्याएं
- बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में भारी दिक्कत
- बच्चों को स्कूल जाने में खतरा
- बुजुर्गों और महिलाओं को आने-जाने में परेशानी
- बरसात में गांव का संपर्क लगभग कट जाना
ग्रामीणों ने कहा कि विकास के नाम पर उन्हें केवल आश्वासन मिले हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ।
“अब झूठे वादों से तंग आ चुके हैं”
मीडिया से बातचीत में ग्रामीणों ने साफ कहा कि इस बार वे मतदान नहीं करेंगे। उनका कहना है कि जब तक सड़क नहीं बनेगी, तब तक गांव में किसी भी चुनावी गतिविधि का समर्थन नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों को अब भी नजरअंदाज किया गया, तो भविष्य में विधानसभा चुनावों का भी बहिष्कार किया जाएगा।
प्रशासन ने क्या कहा?
इस पूरे मामले पर एसडीएम अरुण शर्मा ने कहा कि उन्हें मीडिया के माध्यम से इस विषय की जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि बीडीओ नूरपुर को मामले से अवगत करवाकर एक टीम गांव भेजी जाएगी ताकि लोगों की समस्याओं का समाधान निकाला जा सके।
हालांकि उन्होंने ग्रामीणों से लोकतंत्र में मतदान के महत्व को समझने और अपने मताधिकार का उपयोग करने की अपील भी की।
विकास बनाम वादों की राजनीति
खैरियां पंचायत का यह मामला अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक गांव 40 वर्षों तक सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से क्यों वंचित रहा। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे केवल वादों पर भरोसा नहीं करेंगे, बल्कि जमीनी काम देखने के बाद ही फैसला लेंगे।
गांव के लोगों की यह नाराजगी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए एक बड़ा संदेश मानी जा रही है।
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