कांग्रेस छल से सरकार में न आती, तो हिमाचल आर्थिक रूप से कंगाल न होता : त्रिलोक कपूर

धर्मशाला में भाजपा नेता त्रिलोक कपूर ने सुक्खू सरकार पर फिजूलखर्ची और आर्थिक कुप्रबंधन के आरोप लगाए। हेलीकॉप्टर, सलाहकार और विज्ञापन खर्च पर उठाए सवाल।

Feb 11, 2026 - 15:23
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कांग्रेस छल से सरकार में न आती, तो हिमाचल आर्थिक रूप से कंगाल न होता : त्रिलोक कपूर

संजीव भारद्वाज। धर्मशाला

भाजपा के प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता एवं पार्टी के राष्ट्रीय कार्य परिषद के सदस्य त्रिलोक कपूर ने कहा कि झूठ की बुनियाद पर बनी सुखु सरकार स्वयं अपने अनुभवहीन, अप्रबंधन और पार्टी में मची कलह से कभी भी धराशाई हो सकती है ऐसी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता ।

कपूर ने बताया कि हिमाचल प्रदेश की जनता को इस बात का आश्चर्य है कि देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के दो सलाहकार हैं तो छोटे से हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को आधा दर्जन सलाहकार की फौज नियुक्त करने की क्या आवश्यकता थी लेकिन यह मित्रों की सरकार है और मित्रों के चक्कर में हिमाचल प्रदेश को पूरी तरह बर्बाद करके रख दिया है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में 'व्यवस्था परिवर्तन' के दावों और 'वित्तीय संकट' की दुहाई के बीच पिछले तीन वर्षों का लेखा-जोखा एक गहरे विरोधाभास को जन्म देता है। जब सत्ता के गलियारों से बार-बार यह कहा जाता है कि प्रदेश का खजाना खाली है और विकास के लिए कर्ज लेना मजबूरी है, तब खर्चों की फेहरिस्त कुछ और ही हकीकत बयां करती है। 

भाजपा नेता त्रिलोक कपूर ने बताया कि आर्थिक अनुशासन की बातें तब बेमानी लगने लगती हैं जब हेलीकॉप्टर और लग्जरी काफिलों पर खर्च की सीमाएं टूट जाती हैं। सरकार द्वारा लीज पर लिए गए हेलीकॉप्टर का मासिक फिक्स रेंट ही करीब 1.5 करोड़ रुपये है, जो पिछले 36 महीनों में तेल और संचालन खर्च मिलाकर 60 करोड़ रुपये के पार जा चुका है। इसके साथ ही, मंत्रियों और चेयरमैनों की सुरक्षा और रसूख के लिए नई फॉर्च्यूनर और इनोवा हाईक्रॉस जैसी लग्जरी गाड़ियों की खरीद पर भी लगभग 15 करोड़ रुपये का बोझ डाला गया। 

त्रिलोक कपूर ने कहा कि सुखु सरकार अपने राजनीतिक फैसलों और नीतिगत विवादों को सुलझाने के लिए दिल्ली के महंगे वकीलों की सेवाएं ली गईं, जिनकी प्रति पेशी फीस लाखों में है। विधानसभा की जानकारी के मुताबिक, लगभग 277 वकीलों और एडवोकेट जनरल कार्यालय के भारी-भरकम ढांचे पर करीब 100 करोड़ रुपये की 'फिजूलखर्ची' की गई है। यदि यह राशि जनहित में लगाई जाती, तो सहारा योजना के तहत गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की लंबित पेमेंट आसानी से हो सकती थी। 

उन्होंने हैरानी प्रकट करते हुए बताया कि यह बहुत बड़ी विडम्बना है कि सत्ता में आते ही कांग्रेस सरकार के मंत्रियों चेयरमैन और अधिकारियों ने अपने सरकारी मकानों और दफ्तरों की रिपेयर और रेनोवेशन में 97 करोड़ खर्च कर दिए। इसके अतिरिक्त, उच्चाधिकारियों के आतिथ्य (Hospitality) और हाई-स्पीड इंटरनेट जैसे भत्तों में की गई समय-समय पर बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि आम जनता के लिए 'कटौती' और खास वर्ग के लिए 'छूट' की नीति अपनाई जा रही है। कुल मिलाकर यह 1040 करोड़ रुपये के करीब का वह खर्च है, जिसे टाला जा सकता था, यह सरेआम फ़िजूल खर्च था,  लेकिन इसे 'व्यवस्था परिवर्तन' के नाम पर प्रदेश की जनता की जेब पर लाद दिया गया।

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