क्या देश में अघोषित आपातकाल? अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमले को लेकर देवेन्द्र जग्गी का बड़ा बयान
धर्मशाला में पूर्व महापौर देवेन्द्र जग्गी ने केंद्र सरकार पर अभिव्यक्ति की आज़ादी को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज़ को दबाना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
संजीव भारद्वाज। धर्मशाला
धर्मशाला के पूर्व महापौर देवेन्द्र जग्गी ने केंद्र सरकार पर अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जारी बयान में उन्होंने कहा कि देश में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है मानो अघोषित आपातकाल लागू हो गया हो।
उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना और विरोध दर्ज करना लोकतंत्र का मूल अधिकार है, लेकिन वर्तमान समय में विरोध की आवाज़ को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। जग्गी ने प्रश्न उठाया कि क्या अब शांतिपूर्ण विरोध करना अपराध हो गया है? क्या अपनी असहमति व्यक्त करना लोकतंत्र के विरुद्ध माना जाएगा?
पूर्व महापौर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राजनीतिक द्वेष की भावना से काम कर रही है और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पर्याप्त अवसर न दिया जाना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
जग्गी ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों की समान और महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विपक्ष की आवाज़ को दबाना लोकतंत्र की आत्मा को कमजोर करने जैसा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नेता अपनी ही राज्य की पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाने के बजाय दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते नजर आ रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
अंत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अन्याय और दमन के खिलाफ हमेशा आवाज़ उठाती रही है और आगे भी उठाती रहेगी।
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