कांगड़ा के डॉ परदीप ने 51वीं किताब से रचा इतिहास
कांगड़ा के अर्थशास्त्री डॉ. परदीप कुमार ने 51वीं पुस्तक प्रकाशित कर लेखन की स्वर्ण जयंती मनाई। 34 वर्षों का शिक्षण व शोध अनुभव।
कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र के लिए गर्व की बात है कि प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. परदीप कुमार ने अपनी 51वीं पुस्तक प्रकाशित कर लेखन की स्वर्ण जयंती मनाई है। यह उपलब्धि न केवल शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि क्षेत्र का नाम भी राष्ट्रीय स्तर पर रोशन करती है।
34 वर्षों का समृद्ध शिक्षण और शोध अनुभव
डॉ. परदीप कुमार अर्थशास्त्र में पीएचडी धारक हैं और उन्हें शिक्षण व शोध के क्षेत्र में 34 वर्षों का अनुभव है।
उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं दीं:
- डीएवी कॉलेज, कोटखाई
- एमसीएम डीएवी कॉलेज, कांगड़ा
- केएलबी डीएवी गर्ल्स कॉलेज, पालमपुर (प्राचार्य)
वर्तमान में वे नीलम विश्वविद्यालय, कैथल (हरियाणा) में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं।
शोध और मार्गदर्शन में अहम योगदान
डॉ. परदीप के मार्गदर्शन में कई छात्र पीएचडी कर रहे हैं।
उपलब्धियां:
- 11 शोधार्थियों ने उनके निर्देशन में पीएचडी पूरी की
- 50 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत
- प्रतिष्ठित जर्नलों और संपादित पुस्तकों में प्रकाशन
वे हरियाणा इकोनॉमिक एसोसिएशन के आजीवन सदस्य और इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्य भी हैं।
51वीं पुस्तक के साथ स्वर्ण जयंती
लेखन के क्षेत्र में 50 पुस्तकों के प्रकाशन के बाद डॉ. परदीप कुमार ने अपनी 51वीं पुस्तक “Indian Economy: Some Major Issues” प्रकाशित की।
इस पुस्तक का विमोचन 27 दिसंबर 2024 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन के सम्मेलन में किया गया।
प्रमुख पुस्तकों का राष्ट्रीय स्तर पर विमोचन
डॉ. परदीप की कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन देश के प्रतिष्ठित मंचों पर हुआ है।
कुछ चर्चित पुस्तकें:
- Indian Economy: Development and Challenges
- Impact of COVID-19 on Indian Economy
- Secondary Agriculture in India
- Kautilya Arthshastra and Science of Management
शिक्षा जगत के लिए प्रेरणा
डॉ. परदीप कुमार की यह उपलब्धि दर्शाती है कि निरंतर मेहनत और शोध के प्रति समर्पण से बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
कांगड़ा के इस विद्वान ने अपनी 51वीं पुस्तक के साथ न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल की है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बने हैं। उनका योगदान शिक्षा और शोध के क्षेत्र में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
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