हिमाचल में अब नहीं टूटेंगी सड़कें, IIT संग बड़ा समझौता
हिमाचल में PWD और IIT रोपड़ के समझौते से अब सड़कें होंगी ज्यादा मजबूत। मानसून में भूस्खलन और नुकसान से मिलेगी राहत।
रोजाना हिमाचल ब्यूरो । शिमला
हिमाचल प्रदेश में अब मानसून के दौरान सड़कों के टूटने और भूस्खलन जैसी समस्याओं से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग और आईआईटी रोपड़ के बीच हुए समझौते (एमओयू) के बाद राज्य में सड़क निर्माण की गुणवत्ता और तकनीक में बड़ा बदलाव आने जा रहा है।
इस समझौते के तहत अब हिमाचल की सड़कों को इस तरह से डिजाइन और तैयार किया जाएगा कि वे भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का मजबूती से सामना कर सकें। आईआईटी रोपड़ लोक निर्माण विभाग को आधुनिक तकनीकी सहायता प्रदान करेगा, जिसमें जलवायु अनुकूल डिजाइन, उन्नत ड्रेनेज सिस्टम, ढलान स्थिरीकरण और नदी प्रशिक्षण जैसे कार्य शामिल होंगे।
विशेषज्ञ सड़क निर्माण में नई तकनीकों और सामग्री का उपयोग सिखाएंगे, जैसे स्टेबलाइज्ड बेस और सीमेंट ग्राउटेड बिटुमिनस मैकडैम, जिससे सड़कें अधिक मजबूत और टिकाऊ बनेंगी। साथ ही निर्माण कार्य को अधिक पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए ड्रोन सर्वे, भू-तकनीकी जांच, लैब टेस्टिंग और रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा।
एमओयू के तहत लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उन्हें वर्कशॉप, गाइडलाइंस और तकनीकी मैनुअल उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे नई तकनीकों को बेहतर तरीके से लागू कर सकें।
इस पहल से न केवल सड़कों की उम्र बढ़ेगी, बल्कि बार-बार मरम्मत की जरूरत भी कम होगी, जिससे रखरखाव पर होने वाला खर्च घटेगा। साथ ही भूस्खलन और बाढ़ से होने वाले नुकसान में कमी आएगी और सड़क हादसों पर भी नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।
बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से प्रदेश में पर्यटन, कृषि और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इस संबंध में मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि यह समझौता हिमाचल के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। उन्होंने बताया कि बरसात के दौरान सड़कों को कम से कम नुकसान हो, इसके लिए ही आईआईटी रोपड़ की तकनीक को अपनाया जा रहा है।
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