राजपुर कॉलेज में भारतीय ज्ञान परंपरा पर संगोष्ठी
राजपुर कॉलेज में भारतीय शिक्षण मंडल के स्थापना दिवस पर संगोष्ठी, उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर चर्चा।
मनोज धीमान। पालमपुर
भारतीय शिक्षण मंडल, हिमाचल प्रांत एवं जी.जी.डी.एस.डी. महाविद्यालय, राजपुर के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय शिक्षण मंडल के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर “उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति की जड़ों से जोड़ना तथा पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. अशोक कुमार सरयाल ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि भारत को पुनः विश्वगुरु बनने के लिए अपनी शिक्षा परंपराओं को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने ज्ञान के चार स्तंभ—अर्जन, संरक्षण, संवर्धन और अनुकूलन—पर बल दिया तथा शिक्षा को रोजगारपरक और नैतिक बनाने की आवश्यकता जताई।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विवेक शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा भी है। विशिष्ट अतिथि प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ ने प्रभावी अध्ययन पद्धति को ज्ञान की स्थिरता का आधार बताया।
डॉ. ओम प्रकाश प्रजापति ने मातृभाषा में शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे सीखने की गुणवत्ता बढ़ती है। वहीं डॉ. संगीता सिंह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारतीय परंपरा के समन्वय पर विचार रखते हुए पर्यावरण संरक्षण में पारंपरिक ज्ञान की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
प्रो. कुलभूषण चंदेल ने गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन शिक्षा प्रणाली समग्र विकास पर आधारित थी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीतिका शर्मा ने किया, जबकि अंत में डॉ. जगवीर चंदेल ने सभी का आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी में प्राध्यापक और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही।
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