1 अप्रैल से दवाएं महंगी, आम लोगों पर असर
1 अप्रैल से 900 से अधिक जरूरी दवाएं महंगी होंगी। एनपीपीए के आदेश के तहत एमआरपी में 0.64% तक बढ़ोतरी, आम लोगों पर असर तय।
रोज़ाना हिमचाल ब्यूरो। बीबीएन
नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ आम लोगों पर दवाओं की कीमतों का अतिरिक्त बोझ पड़ने जा रहा है। 1 अप्रैल से आवश्यक दवाओं के दाम बढ़ जाएंगे। यह बढ़ोतरी राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के आदेश के तहत की जा रही है, जिसमें राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची (NLEM) में शामिल 900 से अधिक दवाएं शामिल हैं।
आदेश के अनुसार थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में 0.64 प्रतिशत तक वृद्धि की अनुमति दी गई है। इस फैसले के बाद बुखार, दर्द, संक्रमण, एनीमिया और पोषण से जुड़ी कई सामान्य दवाएं महंगी हो जाएंगी। इनमें पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट्स जैसी जरूरी दवाएं शामिल हैं।
हालांकि यह बढ़ोतरी प्रतिशत के लिहाज से ज्यादा नहीं है, लेकिन इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। खासकर उन परिवारों पर इसका प्रभाव अधिक होगा, जहां नियमित रूप से दवाओं का उपयोग होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API), पैकेजिंग सामग्री और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से दवा कंपनियों का खर्च भी बढ़ा है।
फार्मा उद्योग के अनुसार, इनपुट लागत में भारी वृद्धि के मुकाबले यह मूल्य बढ़ोतरी काफी सीमित है। फिर भी, आम उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव उनके स्वास्थ्य बजट पर अतिरिक्त दबाव जरूर डालेगा।
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