नादौन में बिजली संशोधन विधेयक 2025 के खिलाफ प्रदर्शन

नादौन के गगाल कॉम्प्लेक्स में बिजली संशोधन विधेयक 2025 के खिलाफ कर्मचारियों, पेंशनर्स व उपभोक्ताओं का प्रदर्शन, निजीकरण का विरोध।

Feb 12, 2026 - 21:04
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नादौन में बिजली संशोधन विधेयक 2025 के खिलाफ प्रदर्शन

नादौन ।
बिजली संशोधन विधेयक 2025 के विरोध में नादौन के गगाल कॉम्प्लेक्स स्थित विद्युत मंडल कार्यालय में कर्मचारियों, इंजीनियर्स, पेंशनर्स और उपभोक्ताओं ने संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर भोजनावकाश के दौरान विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित विधेयक को कर्मचारी, पेंशनर्स, उपभोक्ता और राज्य हितों के खिलाफ बताया। विद्युत बोर्ड इम्प्लाईज़ यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष नितिश भारद्धाज ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक 2025 विद्युत वितरण क्षेत्र के निजीकरण का रोडमैप है।

उन्होंने कहा कि विधेयक लागू होने पर एक से अधिक लाइसेंसधारी कंपनियां बिजली आपूर्ति करेंगी। निजी कॉरपोरेट घराने लाभप्रद औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में आपूर्ति करेंगे। ग्रामीण व जनजातीय क्षेत्रों की जिम्मेदारी सार्वजनिक वितरण कंपनी पर ही रहेगी। उन्होंने दावा किया कि विद्युत बोर्ड लिमिटेड का लगभग 65 प्रतिशत राजस्व औद्योगिक क्षेत्रों से आता है, जिस पर निजी कंपनियों का कब्जा हो सकता है, जबकि पेंशन, वेतन और आधारभूत ढांचे की जिम्मेदारी बोर्ड के पास ही रहेगी।

स्मार्ट मीटर पर भी उठे सवाल

विद्युत बोर्ड पेंशनर्स फोरम के वरिष्ठ प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि निजी कंपनियां अपना अलग ढांचा खड़ा करने के बजाय पहले से तैयार सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करेंगी। उन्होंने स्मार्ट मीटर को लेकर चिंता जताते हुए कहा लगभग 2500 करोड़ रुपये का खर्च उपभोक्ताओं से वसूला जाएगा। रियल टाइम डाटा ट्रांसमिशन से टैरिफ लोड के अनुसार बदलेगा। दिन में कम और रात में अधिक दरें लागू हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना के तहत लगभग 12.5 लाख उपभोक्ताओं का बिल शून्य आता है, ऐसे में 10 हजार रुपये के स्मार्ट मीटर लगाने का औचित्य नहीं है। 

विभिन्न संगठनों ने रखा पक्ष

प्रदर्शन के दौरान पेंशन वेलफेयर एसोसिएशन, पेंशनर्स फोरम, कर्मचारी संगठनों और किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने भी विधेयक के खिलाफ अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि यह विधेयक प्रदेश की सार्वजनिक विद्युत व्यवस्था और उपभोक्ताओं के हितों के विपरीत है।

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