टांडा मेडिकल कॉलेज में NRP Day, 50 डॉक्टरों को ट्रेनिंग
टांडा मेडिकल कॉलेज में NRP Day पर 50 से अधिक पीजी डॉक्टरों को नवजात शिशु पुनर्जीवन प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने सुरक्षित नवजात देखभाल पर जोर दिया।
सुमन महाशा। कांगड़ा
डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज (RPGMC) टांडा के बाल रोग विभाग द्वारा Neonatal Resuscitation Program (NRP) Day उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर पीडियाट्रिक्स और प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस प्रशिक्षण में दोनों विभागों के 50 से अधिक पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवजात शिशुओं की आपात स्थिति में बेहतर उपचार और पुनर्जीवन तकनीकों को मजबूत करना रहा।
विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दी हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग
NRP प्रशिक्षण सत्र अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा संचालित किए गए। इसमें:
- डॉ. सीमा शर्मा
- डॉ. प्रदीप अत्री
- डॉ. शिखा
- डॉ. नवेंदु चौधरी
ने प्रतिभागियों को आधुनिक नवजात पुनर्जीवन प्रोटोकॉल और इमरजेंसी मैनेजमेंट की तकनीकों की जानकारी दी।
डॉक्टरों ने प्रशिक्षण के दौरान नवजात शिशुओं की सांस रुकने जैसी आपात स्थितियों से निपटने के व्यावहारिक तरीके भी सिखाए।
नवजात मृत्यु दर कम करने में मददगार: डॉ. मिलाप शर्मा
कार्यक्रम के दौरान डॉ. मिलाप शर्मा ने कहा कि Neonatal Resuscitation Program नवजात शिशुओं के जीवन को सुरक्षित बनाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने बताया कि समय पर और सही तरीके से की गई पुनर्जीवन प्रक्रिया से:
- नवजात मृत्यु दर कम हो सकती है
- जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी से होने वाली समस्याओं को रोका जा सकता है
- सेरेब्रल पाल्सी और अन्य न्यूरोलॉजिकल विकारों के खतरे को घटाया जा सकता है
उन्होंने यह भी कहा कि नवजात देखभाल से जुड़े सभी स्वास्थ्य कर्मियों और स्टाफ नर्सों को नियमित प्रशिक्षण मिलना आवश्यक है।
देशभर में मनाया जा रहा है NRP Day
NRP Day पूरे भारत में नवजात शिशु देखभाल को बेहतर बनाने और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से मनाया जा रहा है।
टांडा मेडिकल कॉलेज में आयोजित यह कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश में उन्नत नवजात चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निष्कर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि नवजात शिशुओं की सुरक्षा और बेहतर भविष्य के लिए प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ बेहद जरूरी है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल डॉक्टरों के कौशल को बढ़ाते हैं बल्कि नवजात शिशुओं के जीवन बचाने में भी अहम योगदान देते हैं।
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