श्रम संहिताओं के खिलाफ LIC कर्मियों की हड़ताल
चार श्रम संहिताओं और निजीकरण नीतियों के विरोध में LIC कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल। शिमला मंडल में भी जोरदार प्रदर्शन, भर्ती व FDI पर उठाए सवाल।
सुमन महाशा। कांगड़ा
देश की केंद्रीय ट्रेड यूनियनों तथा अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संगठन (AIIEA) के आह्वान पर भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के कर्मचारियों ने गुरुवार को देशव्यापी हड़ताल में हिस्सा लिया। शिमला मंडल के कर्मचारियों ने भी विभिन्न मांगों को लेकर इस हड़ताल का समर्थन किया और सरकार तथा प्रबंधन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
हड़ताल का मुख्य कारण केंद्र सरकार द्वारा 21 नवंबर 2025 को चारों श्रम संहिताओं—वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता—को अधिसूचित किए जाने का निर्णय बताया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि ये संहिताएं 29 मौजूदा श्रम कानूनों का स्थान लेकर श्रमिकों के नौकरी सुरक्षा, सामूहिक सौदेबाजी, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्य परिस्थितियों से जुड़े अधिकारों को कमजोर करती हैं।
LIC कर्मचारियों ने भर्ती प्रक्रिया को भी गंभीर मुद्दा बताया। संगठन के अनुसार वर्ष 1995 से 2024 के बीच LIC की इन-फोर्स पॉलिसियों में लगभग 410 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि कर्मचारियों की संख्या में 49 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। सरकार द्वारा संसद में भी इस तथ्य को स्वीकार किए जाने का हवाला देते हुए कर्मचारियों ने कहा कि भारी रिक्तियों के बावजूद वर्षों से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्ती रुकी हुई है। इससे कार्य परिस्थितियां प्रभावित हुई हैं, कर्मचारियों पर अत्यधिक कार्यभार बढ़ा है और औद्योगिक असंतोष में वृद्धि हुई है।
चतुर्थ श्रेणी में भर्ती लगभग ठप होने और स्थायी कार्यों के आउटसोर्सिंग के प्रयासों को लेकर भी कर्मचारियों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यह सहमत मानदंडों का उल्लंघन है और रोजगार सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
हड़ताल की एक प्रमुख मांग LIC में बहुमत प्राप्त ट्रेड यूनियन AIIEA को मान्यता दिए जाने की भी है। कर्मचारियों का कहना है कि बहुमत यूनियन को मान्यता न देना औद्योगिक लोकतंत्र के सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के कन्वेंशन 87 और 98 का उल्लंघन है। उनका दावा है कि देश के सबसे बड़े संगठित कार्यबल में शामिल होने के बावजूद LIC आज भी ऐसा प्रमुख वित्तीय संस्थान है जहां मान्यता प्राप्त यूनियन नहीं है।
कर्मचारियों ने कर्मचारी बीमा कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 का भी विरोध किया है, जिसके तहत बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है। उनका कहना है कि इससे पूर्ण विदेशी स्वामित्व का मार्ग प्रशस्त होगा और पॉलिसीधारकों तथा घरेलू बचतों के हित विदेशी पूंजी के अधीन हो सकते हैं। उन्होंने इसे देश की दीर्घकालिक वित्तीय संप्रभुता के लिए खतरा बताया और सरकार की विनिवेश तथा निजीकरण नीति का विरोध किया।
इसके अतिरिक्त कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि LIC प्रबंधन ने बदलते व्यापार मॉडल, बढ़ते तकनीकी हस्तक्षेप और उनके संभावित रोजगार-विस्थापनकारी प्रभावों पर यूनियनों के साथ कोई संरचित संवाद नहीं किया है। इससे कर्मचारियों में असंतोष और अलगाव की भावना बढ़ी है।
हड़ताली कर्मचारियों ने एलटीसी नकदीकरण, वर्ष 1986 से पूर्व सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए अनुग्रह राशि में वृद्धि, 1995 पेंशन योजना के अंतर्गत सभी कर्मचारियों को पेंशन, पेंशन का अपडेशन तथा भुगतान ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972 के तहत ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये किए जाने सहित कई लंबित मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रबंधन ने उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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